उत्तर प्रदेशबस्ती

नवागत एडीएम ज्ञानचंद्र गुप्त का प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली; एडीएम कार्यालय की बदली कार्यसंस्कृति और व्यवस्था में कसावट

बस्ती सहित चार एडीएम के हुए तबादलों को प्रशासनिक हलकों में 'सजा' के तौर पर देखा जा रहा है। इन सभी अधिकारियों को जिले से हटाकर अपर आयुक्त के पद पर भेजा गया है।

‘सीआरओ’ के लिए ‘खतरा’ बन सकते हैं नए ‘एडीएम’, प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज

  • बस्ती में प्रशासनिक फेरबदल: बस्ती जिले में हाल ही में हुए तबादलों और नए एडीएम ज्ञानचंद्र गुप्त जी के कार्यभार संभालने के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं हैं।
  • नवागत एडीएम का अनुभव: ज्ञानचंद्र गुप्त जी (2018 बैच के पीसीएस) इससे पहले नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एसडीएम और लखनऊ में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य कर चुके हैं। उनके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है।
  • सीआरओ की स्थिति पर असर: वर्तमान में सीआरओ (कुर्ती प्रकाश) का प्रभार किसके पास रहेगा, इसको लेकर अटकलें हैं। नियमानुसार स्थानीय निकाय का प्रभार एडीएम को मिलना चाहिए, लेकिन नवागत एडीएम के आने से सीआरओ के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
  • चारों एडीएम का तबादला और ‘सजा’: बस्ती सहित चार एडीएम का तबादला करके उन्हें सजा के तौर पर अपर आयुक्त बनाया गया है। इन अधिकारियों में:
    • ​कुंवर पंकज (एडीएम एफआर, महोबा से झांसी अपर आयुक्त)
    • ​सत्यप्रकाश सिंह (एडीएम, मेरठ से अपर आयुक्त लखनऊ)
    • ​त्रिभुवन सिंह (एडीएम, बदायूं से अपर आयुक्त प्रयागराज)
    • ​प्रतिपाल सिंह (एडीएम, बस्ती से अपर आयुक्त विंध्याचल)
  • कार्यशैली और अनुशासन: रिपोर्ट के अनुसार, नवागत एडीएम की कार्यशैली से कर्मचारियों और दफ्तर की व्यवस्था में कड़ाई आई है, जिससे एडीएम कार्यालय की कार्यसंस्कृति में बदलाव देखा जा रहा है।

बस्ती, 29 जुलाई 2026: बस्ती जिले में हाल ही में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद कलेक्ट्रेट से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। नवागत एडीएम ज्ञानचंद्र गुप्त के कार्यभार ग्रहण करने के बाद से सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि राजस्व के सबसे अहम पदों में से एक सीआरओ (मुख्य राजस्व अधिकारी) के समक्ष नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

कौन हैं नवागत एडीएम ज्ञानचंद्र गुप्त?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ज्ञानचंद्र गुप्त 2018 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। वे जमीनी स्तर से उठकर आए अधिकारी माने जाते हैं।

प्रशासनिक सफर:
• नायब तहसीलदार से करियर की शुरुआत

• तहसीलदार, एसडीएम रायबरेली, गोंडा, आजमगढ़

• लखनऊ में सिटी मजिस्ट्रेट

जमीन और राजस्व के मामलों की गहरी जानकारी के कारण ही जानकार मान रहे हैं कि राजस्व से जुड़े मामलों में उनकी पकड़ सीआरओ कार्यालय के लिए अप्रत्यक्ष दबाव बना सकती है।

चार एडीएम का तबादला – ‘सजा’ के तौर पर चर्चा

इसी फेरबदल में बस्ती समेत चार जिलों के एडीएम का तबादला कर उन्हें अपर आयुक्त (एडिशनल कमिश्नर) बनाया गया है, जिसे प्रशासनिक गलियारों में ‘सजा पोस्टिंग’ के तौर पर देखा जा रहा है।
• कुंवर पंकज (एडीएम एफआर महोबा) – झांसी मंडल अपर आयुक्त

• सत्यप्रकाश सिंह (एडीएम मेरठ) – लखनऊ मंडल अपर आयुक्त • त्रिभुवन सिंह (एडीएम बदायूं) – प्रयागराज मंडल अपर आयुक्त • प्रतिपाल सिंह (एडीएम बस्ती) – विंध्याचल मंडल अपर आयुक्त

नोट: शासन स्तर पर इस तरह के तबादलों को आधिकारिक तौर पर सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जाता है, लेकिन अंदरखाने शिकायतों और कार्यप्रणाली में कमियों को वजह बताया जा रहा है।

84 पीसीएस अधिकारियों का बड़ा फेरबदल –

यह पूरा फेरबदल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल में किए गए बड़े पीसीएस तबादले का हिस्सा है।

शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश में एक साथ 84 पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस व्यापक तबादला अभियान को प्रशासनिक व्यवस्था में तेजी और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

आधिकारिक सूची में कई जिलों के अपर जिलाधिकारी (ADM), नगर मजिस्ट्रेट और उप जिलाधिकारियों (SDM) को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

कार्यालय में कसावट, पत्रकारों से दूरी पर हिदायत

नए एडीएम के आते ही एडीएम कार्यालय की कार्यशैली में बदलाव दिखने लगा है।

  • कार्यालय में लंबे समय से जमे बाहरी लोगों और अनावश्यक भीड़ पर रोक
  • फाइलों के निस्तारण में टाइम-बाउंड सिस्टम
  • कर्मचारियों में समयबद्धता को लेकर सख्त संदेश
    दूसरी ओर राजनीतिक और मीडिया मैनेजमेंट को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। सूत्र बता रहे हैं कि अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत है कि वे अपने दायरे में रहकर काम करें, ताकि प्रशासनिक और राजनीतिक तालमेल बना रहे।

कार्यालयों में कसावट और राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट

​नए एडीएम के आने से कार्यालय की कार्यसंस्कृति में कड़ाई देखने को मिली है। एडीएम कार्यालय में लंबे समय से जमे डेरा डाले लोगों और अनावश्यक भीड़ पर रोक लगाई गई है, जिससे कर्मचारियों और स्थानीय स्तर पर बड़ा संदेश गया है। हालांकि, दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि पत्रकारों और राजनीतिक लोगों के साथ दूरी या संतुलन बनाने को लेकर अधिकारियों को अपने दायरे में रहकर काम करने की नसीहत दी जा रही है, ताकि प्रशासनिक और राजनीतिक तालमेल बना रहे।

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